मौर्यकालीन राज्य एवं लोककल्याण की आवधारणा‘
Abstract
भारतीय इतिहास में मौर्यकाल एवं सुदृढ़, केन्द्रीय एवं संगठित राज्य व्यवस्था के विकास का महत्वपूर्णकाल कहा जा सकता है। मौर्यकालीन राज्य न केवल राजस्व संग्रह एवं सार्वजनिक जीवन प्रणाली में भी उसकी भूमिका अत्यन्त महत्वपूर्ण थी, अ‛ाोक के ॉाासनकाल में चिकित्सा सुविधाओं औषधीय वनस्पतियों के सार्वजनिक उपयोग की सुविधा के साथ-साथ प‛ाु संरक्षण हेतु किये प्रयास लोककल्याण की भावना को दर्‛ााते हैं। मौर्यकालीन लोककल्याण की नीति आधुनिक लोकतांत्रिक कल्याणकारी राज्य जैसा नहीं स्वीकार किया गया, क्योंकि तत्कालीन समय राज्य की स्थिति राजतन्त्रात्मक एवं केन्द्रीकृत थी। आधुनिक अर्थों में समानता, नागरिक अधिकार एवं सामाजिक सुरक्षा जैसी व्यवस्था लागू नहीं थी, अतः यह कहा जा सकता है कि मौर्यकालीन राज्य ॉाक्ति, प्रजाहित, आर्थिक समृद्धि, एवं नैतिक उत्तरदायित्व की भावनाय स्थापित करने का प्रयास अव‛यय दिखाई पड़ता है। ॉा
