एकल परिवार के बदलते स्वरूप का समाज‛ाास्त्रीय अध्ययन

  • नेहा श्रीवास्तव ॉाोधार्थिनी-समाज‛ाास्त्र, लखनऊ, वि‛वविद्यालय, लखनऊ
  • अजीत कुमार ॉाोध पर्यवेक्षक: एसो0 प्रोफे0 समाज‛ाास्त्र, महाराजा बिजली पासी पी0जी0कालेज, आ‛िायाना लखनऊ।
Keywords: काकी परिवार, सामाजिक मूल्य, नाभिकीय परिवार, पारिवारिक स्वीकार्यता, संरचना, सम्बन्ध, प्रवास, कार्य‛ाीलता, सहयोग, एकाकीपन।

Abstract

व्यक्ति के जीवन में परिवार की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। मनुष्य के जीवन की सबसे महत्वपूर्ण संस्था रही है। समाज के निर्माण में भी परिवार का योगदान निरन्तर प्रवाहमान रहा है। व्यक्ति के जन्म से लेकर जीवन-पर्यन्त सामाजिक, सांस्कृतिक, आर्थिक एवं भावात्मक विकास में परिवार की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। परिवार मात्र पति-पत्नी और बच्चों का समूह ही नहीं बल्कि सामाजिक मूल्यों, सम्बन्धों, भूमिकाओं, उत्तरदायित्वों की एक व्यवस्थित संस्था रही है। परिवार के स्वरूप में होने वाले परिवर्तन व्यापक सामाजिक परिवर्तन का आइना होते हैं। परम्परागत भारतीय समाज में संयुक्त परिवार का अतुलनीय महत्व रहा है। किन्तु बदलते परिवे‛ा में औद्योगीकरण, नगरीकरण आधुनिकीकरण, रोजगार के बदलते अवसर, ‛िाक्षा की व्यापक भागीदारी, महिला स‛ाक्तिकरण, आर्थिक आव‛यकता, व्यक्तिवादी सोंच एवं सामाजिक गति‛ाीलता, परिवर्तित जीवन-‛ौली के कारण संयुक्त परिवार व्यवस्था का विद्यटन और एकल परिवार का विस्तार स्पष्ट रूप से परिलक्षित होता है।

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Published
2026-09-30
How to Cite
श्रीवास्तवन., & कुमारअ. (2026). एकल परिवार के बदलते स्वरूप का समाज‛ाास्त्रीय अध्ययन. Humanities and Development, 21(03), 235-238. Retrieved from https://www.humanitiesdevelopment.com/index.php/had/article/view/440