अमरकान्त के कथा साहित्य में भारतीय संस्कृति

  • नवेन्द्र कुमार ंिसह प्रोफेसर एवं ॉाोध पर्यवेक्षक, हिन्दी विभाग, बुन्देलखण्ड, महाविद्यालय, झांसी (उ0प्र0)।
  • कल्पना सिंह ॉाोध छात्र: हिन्दी विभाग, बुन्देलखण्ड, महाविद्यालय, झांसी (उ0प्र0)।
Keywords: सामाजिक चेतना, मध्यम वर्ग, परिवर्तनकारी संस्कृति, आदर्‛ा लोकभाषा, कथा साहित्य, आधुनिकता, भौतिकवाद, रीति-रिवाज

Abstract

यथार्थवादी कथाकार के रूप में अमरकान्त हिन्दी साहित्य के जगमगाते सितारे हैं, अमरकान्त ने कहानियों एवं उपन्यासों को यथार्थवादी दृष्टिकोण से समझने का प्रयास किया है। उन्होंने भारतीय समाज के यथार्थ को बड़ी ही संवेदना और सहजता के साथ समाज में साझा करने का प्रयास किया है। उनके कथा साहित्य में भारतीय संस्कृति का भाव आदर्‛ावादी अथवा स्थिर रूप में नहीं, बल्कि मध्यम वर्ग या निम्न मध्यम वर्ग के संघर्षों, पारिवारिक सम्बन्धों, सामाजिक मूल्य, परम्पराऐं, लोकाचार तथा परिवर्तित सामाजिक परिवे‛ा में स्पष्ट रूप से देखा समझा जा सकता है। अमरकान्त के कथा-साहित्य में भारतीय संस्कृति मात्र, धार्मिक अनुष्ठानों, परम्परा या रीति-रिवाज में परिलक्षित नहीं होता है। बल्कि वह समाज में मनुष्य के व्यवहार एवं चेतना में भी परिवर्तित परिस्थितियों के झलक की अभिव्यक्ति होती है। अमरकान्त के कथा साहित्य में भारतीय संस्कृति एक गति‛ाील एवं परिवर्तन प्रक्रिया के रूप में भी स्पष्ट होती है। प्रस्तुत ॉाोध पत्र में अमरकान्त के कथा साहित्य के आलोक में लोकधर्म, परिवार तथा नैतिक एवं सामाजिक पक्षों की चर्चा की गई है।

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Published
2026-09-30
How to Cite
ंिसहन. क., & सिंहक. (2026). अमरकान्त के कथा साहित्य में भारतीय संस्कृति. Humanities and Development, 21(03), 227-230. Retrieved from https://www.humanitiesdevelopment.com/index.php/had/article/view/438