सोशल मीडिया का सामाजिक जीवन पर प्रभाव (उत्तर प्रदेश के संभल जिले में चंदौसी विकासखंड के दो गांव करेली व कैथल पर आधारित एक समाजशास्त्रीय अध्ययन)
Abstract
21वीं सदी को सूचना और संचार की सदी कहा जाता है। इस युग में इंटरनेट और डिजिटल तकनीकी विकास ने मानव जीवन के प्रत्येक पहलू को प्रभावित किया है। विशेष रूप से सोशल मीडिया ने सामाजिक जीवन में क्रांतिकारी परिवर्तन लाया है। फेसबुक, इंस्टाग्राम, ट्विटर(ग्) व्हाट्सएप्प ,यूट्यूब ,स्नैपचैट आदि प्लेटफार्म आज केवल संचार के साधन नहीं रह गए हैं, बल्कि यह हमारी पहचान, विचारधारा ,संबंधों और जीवन शैली का हिस्सा बन चुके हैं। सोशल मीडिया ने जहां लोगों को जोड़ने का कार्य किया है वहीं इसने कई सामाजिक समस्याओं को भी जन्म दिया है। वर्तमान में लगभग 75 से 80: जनसंख्या सोशल मीडिया का उपयोग कर रही है। मार्शल मैक्लुहान ने कहा है कि- ष्माध्यम ही संदेश हैष् अर्थात माध्यम की प्रभावशीलता ही संदेश की प्रभावशीलता है। वर्तमान में सोशल मीडिया व्यक्ति को जोड़े रखने का एक सशक्त माध्यम है। सोशल मीडिया व्यक्ति, समूह, संस्था, शिक्षा, स्वास्थ्य ,रिश्ते यहां तक की आर्थिक, सामाजिक, राजनीतिक एवं सांस्श्तिक स्थिति को समृद्ध बना रहा है। यह सोशल मीडिया का सकारात्मक रूप है। सोशल मीडिया का नकारात्मक रुप यह है कि कई शोधों में पाया गया है की आवश्यकता से अधिक सोशल मीडिया का प्रयोग किया जाए तो व्यक्ति में मानसिक विकार उत्पन्न होते हैं और हमें डिप्रेशन की ओर ले जाते हैं। साथ ही अपराधिक व्यक्तित्व वाले व्यक्ति सोशल मीडिया का उपयोग कर आतंकवाद ,साइबर क्राइम और धोखाधड़ी जैसी घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं। प्रस्तुत शोध पत्र उत्तर प्रदेश के संभल जनपद के चंदौसी विकासखंड के दो गांव करेली एवं कैथल पर आधारित है। जिसके द्वारा गांव के लोगों के माध्यम से सोशल मीडिया के सकारात्मक और नकारात्मक प्रभाव का विश्लेषण करना तथा यह समझने का प्रयास करना कि इसका समाज पर क्या व्यापक प्रभाव पड़ रहा है।
