ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्र के बीव्म्एड्व्म् छात्राध्यापिकाओं की शैक्षिक प्रौद्योगिकी के प्रति अभिवृत्ति का तुलनात्मक अध्ययन
Abstract
शैक्षिक प्रौद्योगिकी शिक्षा को कई मायनों में प्रभावित करती है। नये प्रौद्योगिकी क्षेत्र-जैसे मशीन लर्निंग, ब्लक चेन, स्मार्ट बोर्ड, हस्त संचालित कम्प्यूटरिंग बोर्ड और अन्य प्रकार के साफ्टवेयर द्वारा न केवल यह परिवर्तन होगा कि छात्र क्या सीखता है वरन यह भी परिवर्तन होगा कि, वो कैसे सीखता है। इस प्रकार इन क्षेत्रों में भविष्य में भी प्रौद्योगिकी एवं शैक्षिक दोनों श्ष्टि से व्यापक शोध की आवश्यकता होगी। शैक्षिक प्रौद्योगिकी की आवश्यकता शिक्षण अधिगम और आंकलन प्रक्रियाओं को बेहतर बनाना, शिक्षकों की तैयारी एवं व्यवसायिक विकास में सहयोग करना, शैक्षिक पहुच को बढ़ाना, शैक्षिक नियोजन, प्रबन्धन एवं प्रशासन को सरल एवं व्यवस्थित करना है। विगत वर्षों में अनेक शोधों के द्वारा यह समझने और जानने का प्रयास किया गया कि किस प्रकार की अभिवृत्ति वाले शिक्षक अच्छा एवं प्रभावशाली शिक्षण करते हैं। अभिवृत्ति किसी परिस्थिति, व्यक्ति या वस्तु के प्रति किसी विशेष ढंग से किसी विशेष सघनता से प्रतिक्रिया करने की तत्परता है। प्रौद्योगिकी के माध्यम से शिक्षा को उन्नत बनाने के लिए विकसित भारत 2047 के तहत ।प् स्कूलों मे पढाया जाना सुनिश्चित किया गया है। वै‛िवक ।प् गोष्ठी 2026 भारत में सम्पन्न हुई हैं जिसमें भारत ।प् क्षमता को दुनिया ने देखा भारत सरकार द्वारा बजट 2026-2027 में 139289 करोड़ रूपयेे शिक्षा के लिए दिया गया जिसमें से शिक्षा में ।प् को बढ़ावा देने के लिए 500 करोड़ रूपये से ।प् सेन्टर बनाया जायेगा। 5 बडे राष्टीय स्तर के कौशल केन्द्र विकसित किये जायेगें जो ग्लोबल (वै‛िवक) पार्टनरशिप में होगा। वर्तमान में प्दकपं ।प् थ्नजनतम ेापसस उपेेपवद के तहत 8.6 लाख विद्यार्थियों में ।प् पाठ्यक्रम में प्रवेश लिया है ये सब विकसित भारत 2047 के तहत ही हो रहा है।
