बृहत्त्रयी में नायक विवेचन
Abstract
त्रयी शब्द का अर्थ तीन का समूह है भारतीय संस्कृति में तीन (त्रयी) के समूह को शुभ का संकेतक माना गया है। बृहत्त्रीय के अन्तर्गत संस्कृत साहित्य के निम्नलिखित तीन महाकाव्य आते हंै-
1. भारविकृत किरातार्जुनीय
2. माघकृत, शिशुपालवध
3. श्रीहर्षकृत, नैषधीयचरित्र
तीनों की कथा इतिहासोöव है। तीनांे ही नायक धीरोदात्त कोटि के हैं भारवि और श्रीहर्ष के काव्यों का नामकरण नायक के नाम पर हुआ है माघ के काव्य का नामकरण घटना के आधार पर किरातार्जुनीय एवं नैषध के नायक क्रमशः अर्जुन एवं नल सछंश क्षत्रिय है। शिशुपाल वध के नायक श्रीकृष्ण देव श्रेणी में आते हंै। तीनों रुढ़वंश हैं। तीनों की शारीरिक शोभा का वर्णन अतिविस्तार से किया गया है। तीनांे तेजस्वी गुण सम्पन्न शास्त्र-चक्षु शूर, त्यागी, गुणानुरागी तथा शास्त्रोक्त नियमों के पालक हैं। तीनों ऋषि, मुनि तथा देवादि का सत्कार करने में प्रवीण हैं आज्ञाकारी तथा विनीत हैं प्रस्तुत लेख में बृहत्त्रयी के ग्रन्थों के तीनों नायकों के चरित्र विधान पर चर्चा की गई है। इस लेख के माध्यम से इन महत्वपूर्ण चरित्रों का विवेचन तुलनात्मक रुप से किया गया है।
