श्भारत में लैंगिक असमानता का विश्लेषणरू चुनौतियाँ, प्रगति और संभावनाश्
Abstract
भारत में लैंगिक असमानता एक दीर्घकालिक सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक चुनौती रही है। ऐतिहासिक रूप से महिलाओं को शिक्षा, स्वास्थ्य, संपत्ति और निर्णय-निर्माण की प्रक्रियाओं में पुरुषों के समान अवसर नहीं मिल पाए। यद्यपि स्वतंत्रता के पश्चात् और विशेषकर संविधान में प्रदत्त समानता के अधिकार, पंचायती राज व्यवस्था में महिलाओं का आरक्षण, शिक्षा के प्रसार तथा सरकारी योजनाओं के माध्यम से उल्लेखनीय प्रगति हुई है, फिर भी व्यवहारिक स्तर पर असमानता विभिन्न रूपों में विद्यमान है। वेतन असमानता, बाल विवाह, लैंगिक हिंसा, महिला स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियाँ और रोजगार में असमान भागीदारी जैसे मुद्दे आज भी गंभीर हैं। वर्तमान परिप्रेक्ष्य में लैंगिक असमानता के विरुद्ध शिक्षा, जागरूकता, विधिक सशक्तिकरण और तकनीकी सहभागिता महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। साथ ही, महिला उद्यमिता, नेतृत्व और डिजिटल मंचों पर बढ़ती उपस्थिति भविष्य की संभावनाओं को रेखांकित करती है। अतः भारत में लैंगिक समानता की दिशा में की गई प्रगति को और अधिक सु२ढ़ करने के लिए सामाजिक मानसिकता में परिवर्तन, नीतिगत प्रतिबद्धता तथा सतत प्रयास आवश्यक हैं।
