‘‘महिला सशक्तिकरण में संविधान एवं शिक्षा की भूमिका’’
Abstract
शोध-सार वर्तमान आधुनिक भारतीय सामाज के समग्र विकास में संविधान की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। जब महिलाऐं शिक्षित, आत्मनिर्भर एवं निर्णय लेने की प्रक्रिया में सक्षम होती हैं तभी समाज में समानता, न्याय और प्रगति का मार्ग प्रशक्त होता है। वास्तविक भारत के निर्माण में महिलाओं की भूमिका पुरुषों से कम नहीं है। महिला सशक्तिकरण की दिशा में संविधान और शिक्षा दोनों का अतुलनीय प्रयास रहा है। संविधान में भारत के नागरिकों (महिला एवं पुरुष) के लिए मूल अधिकारों के अतिरिक्त समानता, स्वतंत्रता और न्याय की गारण्टी दी गयी है।1 संविधान द्वारा प्रदत्त मौलिक अधिकारों के द्वारा उन समानताओं को दूर करने का प्रयास किया गया है जिससे महिलाऐं पीड़ित थी।2 भारतीय संविधान के माध्यम से ही समाज के सभी वर्गों के साथ-साथ महिलाओं की शिक्षा का पूर्ण अधिकार प्राप्त हो सका है।
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Published
2025-09-30
How to Cite
सिन्हाक. (2025). ‘‘महिला सशक्तिकरण में संविधान एवं शिक्षा की भूमिका’’. Humanities and Development, 20(03). Retrieved from https://www.humanitiesdevelopment.com/index.php/had/article/view/305
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