औद्योगिक उपक्रमांे का ग्रामीण जीवन पर प्रभाव

  • अवधेश मौर्या शोध छात्र-समाजशास्त्र, डॉ0 राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय, अयोध्या (उ0प्र0)
  • सुधांशु वर्मा शोध निर्देशक-असि0 प्रोफेसर, समाजशास्त्र आचार्य देव किसान पी0जी0 कालेज, बभनान, गोण्डा (उ0प्र0)

Abstract

शोध-सार भारत कृषि प्रधान देश है। यहाँ की लगभग 70 प्रतिशत जनसंख्या कृषि पर निर्भर करती है। 20वीं शताब्दी के उत्तरार्द्ध में 1991 के आर्थिक उदारीकरण के पश्चात् औद्योगिक विकास तीव्र गति से बढ़ा, उद्योगों का विस्तार नगरीय क्षेत्र तक सीमित न होकर ग्रामीण एवं कस्बाई क्षेत्र को भी प्रभावित किया है। वास्तव में ग्रामीण सामाजिक संरचना को औद्योगिक गतिविधियों ने बड़ी गहराई तक प्रभावित किया है। ग्रामीण जीवन पर औद्योगिक उपक्रमों का प्रभाव सकारात्मक और नकारात्मक दोनों रही है। जहाँ ग्रामीण परिवेश में भी रोजगार, आय और तकनीकी उद्योग का प्रचलन बढ़ा है, वहीं औद्योगिक इकाईयों से वायु, जल और भूमि प्रदूषण का प्रभाव बढ़ा है। खाद्य सुरक्षा पर भी संकट आया। औद्योगिक अधिग्रहण से कहीं न कहीं किसानों में भूमिहीनता भी बढ़ी, सिंचाई के स्रोत प्रभावित हुए। साथ ही ग्रामीण समाज में आधुनिकता, शिक्षा रोजगार के साथ विकास कार्य हो रहा है।

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Published
2025-09-30
How to Cite
मौर्याअ., & वर्मास. (2025). औद्योगिक उपक्रमांे का ग्रामीण जीवन पर प्रभाव. Humanities and Development, 20(03). Retrieved from https://www.humanitiesdevelopment.com/index.php/had/article/view/304