प्रतिरुप मंत्रिमण्डल के रुप में विपक्ष की भूमिका

  • कुमुद रंजन शोध निर्देशक-आचार्य, राजनीति शास्त्र, का0सु0 साकेत पी0जी0 कालेज, अयोध्या (उ0प्र0)
  • वेद प्रकाश शोध छात्र-राजनीतिशास्त्र, का0सु0 साकेत पी0जी0 कालेज, अयोध्या (उ0प्र0)
Keywords: प्रतिरुप मंत्रिमण्डल, क्रियान्वयन, नीतियाँ, शोषण, लोकतंत्र, सशक्तिकरण, वजूद, सत्ता, विपक्ष, वैकल्पिक सरकार, निरंकुशता।

Abstract

प्रतिरुप मंत्रिमण्डल का आशय सरकार के मंत्रिमण्डल जैसा वैकल्पिक मंत्रिमण्डल जिसकी परिकल्पना विपक्ष द्वारा की जाती है। इस वैकल्पिक मंत्रिमण्डल में विपक्ष के प्रमुख नेता सरकार द्वारा गठित मंत्रिमण्डल के स्वरूप जैसा ही मंत्रालय बनाकर मंत्री नियुक्त किये जाते हैं। वह वास्तविक मंत्रिमण्डल का भाग न होकर केवल ‘प्रतिरुप मंत्री’ कहलाते हैं। इस प्रकार के मंत्रियों का उत्तरदायित्व सरकार द्वारा गठित मंत्रलायों की नीतियों, योजनाओं और कार्यों पर दृष्टि रखना होता है। साथ ही प्रतिरुप मंत्रियों का कार्य जनता के बीच जा कर अपना वैकल्पिक सुझाव तथा दृष्टिकोण प्रस्तुत करना है, जिससे सरकार द्वारा चलाये जा रहे कार्यक्रमांे का जनमानस के बीच उचित क्रियान्वयन हो सके साथ ही सरकार की अनुचित नीतियों को जनमानस के बीच रखकर उसका विरोध कर सरकार को उत्तरदायी ठहराया जा सके।

Downloads

Download data is not yet available.
Published
2025-09-30
How to Cite
रंजनक., & प्रकाशव. (2025). प्रतिरुप मंत्रिमण्डल के रुप में विपक्ष की भूमिका. Humanities and Development, 20(03). Retrieved from https://www.humanitiesdevelopment.com/index.php/had/article/view/303