वर्तमान सामाजिक परिवेश में परिवार की बदलती भूमिका
Keywords:
समाज, परिवार, सांस्कृतिक, धार्मिक, जीवन, सम्बन्ध।
Abstract
सारांश- परिवार मानव समाज की पूर्णतः मौलिक एवं सार्वभौमिक इकाई है। हम में से प्रत्येक किसी न किसी परिवार का सदस्य है। परिवार एक मात्र प्राकृतिक समूह है प्राणी शास्त्रीय सम्बन्धों के आधार पर बहुत से समूहों का निर्माण होता है। मानव का सम्पूर्ण जीवन समाज में व्यतीत होता है। समाज व्यक्ति को जन्म से लेकर मृत्यु तक प्रभावित करता है। परिवार के मूल में स्त्री-पुरूष है और समाज में परिवार की केन्द्रीय स्थिति होती है। वास्तव में परिवार समाज की आधार भूत इकाई है। परिवार से ही समाज का विस्तार हुआ है और उस पर ही प्रत्येक समाज का जीवित रहना निर्भर करता है। परिवार सन्तानोत्पत्ति द्वारा समाज के लिए नवीन सदस्यों की भर्ती करता है, जो मृत व्यक्तियों के रिक्त स्थान की पूर्ति करते रहते हैं और इस प्रकार की निरन्तरता बनाये रखते हैं।
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Published
2025-09-30
How to Cite
सिंहअ., & वत्सम. (2025). वर्तमान सामाजिक परिवेश में परिवार की बदलती भूमिका. Humanities and Development, 20(03). Retrieved from https://www.humanitiesdevelopment.com/index.php/had/article/view/300
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